সোমবার, মার্চ 31

धर्मेंद्र: भारतीय सिनेमा का अनमोल रत्न

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परिचय

धर्मेंद्र, भारतीय सिनेमा के एक अनमोल रत्न हैं, जो न केवल एक प्रतिष्ठित अभिनेता हैं, बल्कि अपने समय के सबसे बड़े स्टार्स में से एक रहे हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा, करिश्माई अभिनय और वास्तविकता में आत्मीयता ने उन्हें दर्शकों के दिलों में स्थायी स्थान दिलाया है। जैसे-जैसे भारतीय सिनेमा विकसित हुआ है, धर्मेंद्र ने भी अपने आप को हर दौर के अनुसार ढाला है, जो उन्हें और भी खास बनाता है।

फिल्मी करियर

धर्मेंद्र का फिल्मी करियर 1960 के दशक में शुरू हुआ था। उन्होंने ‘फारीदाबाद’ और ‘गुनगुनाती शाम’ जैसी फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए। लेकिन असली सफलता ‘आसमान महल’ (1964) से मिली। बाद में, उन्होंने ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, और ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ जैसी हिट फिल्मों में अपने अभिनय की धाक जमाई। ‘शोले’ में उनके निभाए गए वीरू के किरदार ने उन्हें एक आइकन बना दिया।

विशिष्टता और उपलब्धियां

धर्मेंद्र केवल एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक मानवता के प्रतीक भी हैं। उनके सरल स्वभाव और जनसामान्य से जुड़ाव ने उन्हें बहुत ही प्रिय बना दिया है। उन्होंने कई फिल्मों में शानदार अभिनय के लिए कई पुरस्कार जीते हैं। इसके अलावा, उन्हें 2012 में ‘#LifetimeAchievementAward#’ से भी सम्मानित किया गया था।

निजी जीवन और सामाजिक कार्य

धर्मेंद्र का जीवन फिल्म उद्योग से बाहर भी प्रेरणादायक है। वह एक सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ किसानों के हितों के लिए भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कई सामाजिक अभियानों में भाग लिया है, विशेषकर ग्रामीण विकास और शिक्षा के क्षेत्र में।

निष्कर्ष

धर्मेंद्र का योगदान न केवल सिनेमा बल्कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण रहा है। उनकी विविधता और समर्पण ने उन्हें भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी है। वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियाँ उन्हें एक प्रेरणा के रूप में देखती रहेंगी। सिनेमा के साथ-साथ उनके सामाजिक कार्यों के कारण वे हमेशा याद किए जाएंगे।

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