বৃহস্পতিবার, এপ্রিল 2

दमन अपसाइड परियोजना: ONGC की Arabian Sea में गैस उत्पादन की नई शुरुआत

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परिचय

ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू गैस आपूर्ति के लिहाज से समुद्री गैस परियोजनाओं की महत्ता बढ़ रही है। ONGC द्वारा ‘ongc gas production arabian sea’ की कीवर्ड से जुड़ी दमन अपसाइड डेवलपमेंट परियोजना (DUDP) का उत्पादन शुरू होना राष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और आपूर्ति चेन की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू गैस आपूर्ति बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।

मुख्य विवरण

स्टेट-ओनर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने 29 मार्च को अरबी सागर में दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के प्लेटफॉर्म B-12-24P से गैस का उत्पादन प्रारंभ कर, मनीटाइजेशन की प्रक्रिया आरंभ की। कंपनी ने 30 मार्च को रुगुलेटरी फाइलिंग और घोषणाओं के माध्यम से बताया कि यह उपलब्धि परियोजना की मजबूत निष्पादन क्षमता और ड्रिल-डेक जैसी नवीन तकनीकों के प्रयोग की वजह से संभव हुई।

परियोजना समुद्र में मुंबई से लगभग 180 किमी उत्तर-पश्चिम तथा गुजरात के पिपावव से लगभग 80 किमी दक्षिण में स्थित है। DUDP का लक्ष्य चार नए वेलहेड प्लेटफार्मों और लगभग 140 किलोमीटर की पाइपलाइन के माध्यम से कुल लगभग 21.5 बिलियन घन मीटर गैस उत्पादन करना है, जो हैज़रा प्लांट तक पहुंचाई जाएगी। परियोजना को पुरस्कार की तारीख से कम दो वर्षों में निष्पादित किया गया और अनुमानित पीक उत्पादन करीब 5 मिलियन स्टैण्डर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन तक पहुंचने की उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार परियोजना का मान लगभग 1 बिलियन डॉलर बताया गया है। ONGC ने जनवरी के पहले सप्ताह में संबंधित गतिविधियों के लिए टेंडर निकाला था और वैश्विक खिलाड़ियों जैसे Shell, ExxonMobil, TotalEnergies और Chevron सहित लगभग दस कंपनियों को बोली के लिए संपर्क किया गया था। कंपनी ने ड्रिलिंग और प्रोडक्शन टीमों के मजबूत प्रदर्शन को इस सफलता का श्रेय दिया है।

निष्कर्ष और महत्व

दमन अपसाइड परियोजना से गैस उत्पादन शुरू होना घरेलू ऊर्जा आपूर्ति में योगदान देगा और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है। परियोजना का फेज-वार रैंप-अप और पाइपलाइन के माध्यम से हैज़रा तक निरंतर आपूर्ति आने से औद्योगिक और घरेलू ग्राहकों के लिए उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। आगे के महीनों में उत्पादन बढ़ने पर परियोजना का आर्थिक और रणनीतिक महत्व और अधिक स्पष्ट होगा, जबकि ONGC की परियोजना निष्पादन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से संवाद अहम भूमिका निभाएंगे।

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