বুধবার, মার্চ 18

el niño southern oscillation: कारण, प्रभाव और भविष्यवाणी

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परिचय

el niño southern oscillation (ENSO) एक महत्त्वपूर्ण समुद्री‑वायुमंडलीय चक्र है जो वैश्विक मौसम और जलवायु पैटर्न को प्रभावित करता है। इसका अध्ययन इसलिए आवश्यक है क्योंकि ENSO की अवस्था से कृषि उत्पादन, जल संसाधन, आपदाएँ (बाढ़ और सूखा), तथा तापमान असामान्यताएँ प्रभावित होती हैं। भारत जैसे देशों के लिए ENSO विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह मानसून की तीव्रता और वितरण को बदल सकता है।

मुख्य विवरण

क्या है el niño southern oscillation?

ENSO दो मुख्य अवस्थाओं में आता है: El Niño (गरम चरण) और La Niña (ठंडा चरण)। El Niño के दौरान मध्य‑पूर्वी और दक्षिणी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ऊँचा रहता है, जबकि La Niña में यह सामान्य से कम रहता है। ‘Southern Oscillation’ वायुमंडलीय दबाव का एक सुई जैसा उतार‑चढ़ाव दर्शाता है, जो प्रशांत के दो हिस्सों—उदाहरणस्वरूप ताहिती और डार्विन—के मध्य दबाव भिन्नता से मापा जाता है।

प्रभाव और उदाहरण

ENSO का प्रभाव वैश्विक तथा क्षेत्रीय दोनों स्तर पर होता है। El Niño के दौरान भारत में मानसून कमजोर होकर कम वर्षा का कारण बन सकता है, जिससे कृषि और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ता है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण‑पूर्व एशिया में सूखा और आग की आशंका बढ़ती है, जबकि पेरू और इक्वाडोर के तटीय क्षेत्रों में भारी वर्षा और बाढ़ के मामले बढ़ सकते हैं। ENSO महासागरीय धाराओं, तूफान‑गतिविधि और वैश्विक औसत तापमान को भी प्रभावित करता है।

निगरानी और भविष्यवाणी

ENSO की मॉनिटरिंग में समुद्र की सतह का तापमान (विशेषकर Niño 3.4 सूचक), वायुदाब सूचकांक (SOI), उपसतही ऊष्मा और उपग्रह डेटा का उपयोग होता है। राष्ट्रीय मौसम संस्थाएँ जैसे NOAA, BOM और IMD नियमित चेतावनी और मौसमी पूर्वानुमान जारी करती हैं। भविष्यवाणी सामान्यतः कई माह तक संभाव्य प्रवृत्तियाँ बताती है, पर शत‑प्रतिशत सटीकता सीमित होती है।

निष्कर्ष

el niño southern oscillation वैश्विक मौसम प्रणाली का एक केन्द्रीय हिस्सा है जिसका प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और आपदा‑प्रबंधन पर गहरा पड़ता है। नीति‑निर्माताओं, किसानों और जल प्रबंधकों के लिए ENSO आधारित मौसमी सूचनाओं का उपयोग जोखिम को कम करने और संसाधनों का अनुकूल प्रबंधन करने में सहायक होगा। आने वाले वर्षों में ENSO और जलवायु परिवर्तन के आपसी प्रभाव पर निरंतर अनुसंधान व निगरानी आवश्यक रहेगी ताकि बेहतर भविष्यवाणी और तैयारियाँ सुनिश्चित की जा सकें।

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