ongc share price: ताज़ा रुझान और अहम आँकड़े

परिचय: क्यों महत्त्वपूर्ण है ongc share price
Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) भारत के ऊर्जा सेक्टर की अग्रणी कंपनियों में से एक है और इसका शेयर प्राइस न केवल निवेशकों के लिए बल्कि तेल एवं गैस क्षेत्र की समग्र सेहत का संकेत देता है। ongc share price में उतार-चढ़ाव घरेलू ऊर्जा मांग, वैश्विक तेल की कीमतों, सरकारी नीतियों और संस्थागत धारकों के रुझानों से जुड़ा होता है। इसलिए ताज़ा प्राइस रीडिंग निवेश निर्णय और बाजार अभिव्यक्ति दोनों के लिए प्रासंगिक रहती है।
मुख्य खबर — ताज़ा आँकड़े और घटनाक्रम
इंट्राडे और लाइव प्राइस नोट्स
सूत्रों के अनुसार दिन के दौरान अलग-अलग समय पर ongc share price में हल्का ऊपर-नीचे देखा गया। 11:54am IST पर शेयर ₹280.95 पर था, जो पिछले क्लोज ₹279.70 के मुकाबले ₹1.25 (0.45%) की बढ़त दर्शाता है; उसी सत्र में स्टॉक ने ओपनिंग प्राइस ₹288.00 भी दर्ज किया था। अन्य लाइव नज़रिए में NSE पर कुछ समय के लिए प्राइस ₹279.10 (‑0.36%) और क्लोज ₹279.70 (-0.14%) जैसी रीडिंग भी रिपोर्ट हुईं।
दैनिक और समग्र संकेत
अलग‑अलग समय‑बिंदुओं के स्नैपशॉट बताते हैं कि ongc share price दिन के भीतर सीमित उतार‑चढ़ाव दिखा रहा है। एक स्रोत के मुताबिक 23 फरवरी 2026 को 03:12pm IST पर शेयर पिछले क्लोज ₹274.65 की तुलना में 1.14% नीचे होकर लगभग ₹275.50–₹275.60 के स्तर पर था। इस प्रकार दैनिक व्यापार में हल्की वेरिएबिलिटी देखने को मिली।
दीर्घकालीन आँकड़े
31 दिसंबर 2025 तक कंपनी के कुल 1,258.03 करोड़ शेयर्स आउटस्टैंडिंग थे और मार्केट कैप reported लगभग ₹3,45,266 करोड़ है, जिससे ONGC गैस व पेट्रोलियम सेक्टर में मार्केट‑कॅप रैंकिंग में शीर्ष पर है। कंपनी ने पिछले 52 हफ्तों में उच्चतम ₹280.80 और न्यूनतम ₹205.00 देखा है। संस्थागत धारकों में म्यूचुअल फंड्स ने कुल DII होल्डिंग्स का 8.28% रखा हुआ है।
निष्कर्ष और उपयोगकर्ता के लिए संकेत
स्रोतों से मिले विविध समय‑स्नैपशॉट दिखाते हैं कि ongc share price वर्तमान में 52‑सप्ताह के उच्च स्तर के करीब तैर रहा है और दिन भर में सीमित उतार‑चढ़ाव रहा। निवेशक और पाठक ध्यान रखें कि तात्कालिक निर्णय से पहले हालिया समय‑सीरीज़, तेल की वैश्विक कीमतें, सरकारी नीतियाँ और संस्थागत फंडिंग की स्थिति को देखते हुए जोखिम प्रबंधन अपनाना जरूरी है। निकट भविष्य में प्राइस रेंज की दिशा ऊर्जा बाज़ार और मैक्रो‑इकोनॉमिक संकेतों पर निर्भर रहेगी।









