বুধবার, ফেব্রুয়ারি 25

होली कब है: तारीख, महत्त्व और मनाने का तरीका

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परिचय

होली भारत का प्रमुख रंगोत्सव है जो सामाजिक मेल-जोल, बुराई पर अच्छे की जीत और ऋतुओं के परिवर्तन का संकेत देता है। “होली कब है” यह जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहार चन्द्र कैलेंडर पर आधारित होता है और हर वर्ष तारीख बदलती है। यात्रा, आयोजन, स्कूलों की छुट्टियाँ और सार्वजनिक तैयारी के लिए सही तारीख जानना उपयोगी होता है।

मुख्य बातें

कब और क्यों?

परंपरागत रूप से होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा (फाल्गुन पूर्णिमा) को मनाई जाती है। हिन्दू चंद्र मास के अनुसार पूर्णिमा वाले दिन रंगों से खेलना और होलिका दहन की रात्रि मनाई जाती है। इसीलिए होली आमतौर पर फरवरी या मार्च में आती है। होलिका दहन पूर्णिमा से एक रात पहले या उसी रात को होता है, जबकि रंगों वाली होली का मुख्य उत्सव पूर्णिमा के दिन या उसके अगले दिन हो सकता है (क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार)।

क्षेत्रीय विविधताएँ

भारत में होली के आयोजन में विविधता है: उत्तर भारत में ‘रंगवाली होली’ और ‘छोटी होली’ लोकप्रिय हैं; ब्रज क्षेत्र में बार्साना-नन्दगाँव में ‘लठमार होली’ का विशेष आयोजन होता है; पूर्वी भारत में ‘दोल जत्रा/দোলযাত্রা’ के नाम से मनाया जाता है। इसी तरह बिहार, बंगाल, ओडिशा और असम में भी स्थानीय रीति-रिवाज जुड़े होते हैं।

तारीख कैसे जांचें?

क्योंकि होली चंद्र कैलेंडर पर निर्भर करती है, साल-दर-साल तारीख बदलती है। सटीक तारीख और समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग, ज्योतिष कैलेंडर, या आधिकारिक धार्मिक/सामाजिक संस्थाओं की सूचनाएँ देखें। कई ऑनलाइन पंचांग और स्मार्टफोन एप वर्षानुसार फाल्गुन पूर्णिमा तथा होलिका दहन का समय प्रकाशित करते हैं।

निष्कर्ष

होली का सटीक दिन हर वर्ष बदलता है क्योंकि यह चंद्रमास पर निर्भर है। यदि आप किसी विशेष वर्ष (जैसे 2026) की होली की तारीख जानना चाहते हैं, तो कृपया वह वर्ष बताइए—मैं उसी आधार पर आपको सटीक जानकारी देने में मदद करूँगा। सामुदायिक तैयारी, यात्रा योजनाएँ और पर्यावरण-सुरक्षा (प्राकृतिक रंगों का उपयोग, पानी की बचत) की योजना बनाते समय सही तारीख जानना उपयोगी रहेगा।

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