शिवरात्रि कब है: तिथि, अर्थ और पूजा-विधि

परिचय: महत्त्व और प्रासंगिकता
शिवरात्रि हिन्दू धर्म में भगवान शिव को समर्पित प्रमुख व्रतों में से एक है। अनेक श्रद्धालु इस दिन दिन-रात जागरण, उपवास और शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं। सवाल “शिवरात्रि कब है” अक्सर लोग पूछते हैं क्योंकि यह पर्व सौर-सौर कैलेंडर के बजाय चंद्र-आधारित हिंदू पंचांग पर निर्भर करता है, इसलिए हर साल इसकी तिथि बदलती रहती है।
मुख्य भाग: तिथि, गणना और परंपराएँ
तिथि कैसे तय होती है?
सामान्यतः महा शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (चंद্রमा के घटते चरण की 14वीं तिथि) में आती है, जो फाल्गुन माह (जनवरी-मार्च के बीच) में पड़ती है। कुछ क्षेत्रीय परंपराओं और पञ्चांगों में यह महीना भिन्न दिख सकता है (उदाहरण के लिए कुछ स्थानों पर यह माघ माह में भी दर्ज हो सकता है)। इसलिए यह एक चलनशील तिथि है और साल-दर-साल बदलती रहती है।
मासिक शिवरात्रि और महा शिवरात्रि
हर माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, जबकि महा शिवरात्रि वही विशेष पावन दिन है जिसे व्यापक रूप से उपवास और रात्रि जागरण के साथ मनाया जाता है। महा शिवरात्रि का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव अधिक व्यापक होता है।
पूजा-विधि और प्रथाएँ
परंपरागत रूप से भक्त सुबह से उपवास रखते हैं, रात्रि में जागरण करते हैं, मंदिरों में शिवलिंग पर दूध, जल, बेलपत्र, दूर्वा, और फल अर्पित करते हैं। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, कथा-होना और रुद्राभिषेक जैसे विशेष अनुष्ठान होते हैं।
निष्कर्ष: क्या करना चाहिए और पाठक के लिए महत्व
यदि आप जानना चाहते हैं कि इस साल “शिवरात्रि कब है”, तो स्थानीय पंचांग, मंदिरों की घोषणाएं या विश्वसनीय ऑनलाइन पञ्चांग सेवाएँ देखें क्योंकि तिथि व मुहूर्त स्थान और पञ्चांग-प्रथा पर निर्भर करते हैं। धार्मिक आयोजन में भाग लेने वाले लोगों के लिए समय, आराधना-विधि और सुरक्षा निर्देशों की पुष्टि करना उपयोगी होगा। शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व व पूजन-प्रथा दोनों ही व्यक्तिगत श्रद्धा और सामुदायिक परंपरा के लिए महत्वपूर्ण हैं।









