railway budget 2026: ₹2.93 लाख करोड़ कैपेक्स और हाई‑स्पीड योजनाएं

परिचय: क्यों महत्वपूर्ण है railway budget 2026
railway budget 2026 राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे और यात्रा सुविधाओं के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह बजट न केवल रेलवे की क्षमताओं में विस्तार का संकेत देता है, बल्कि आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी पर भी असर डालेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट में रेल मंत्रालय के लिए बड़े स्तर का पूंजीगत व्यय (capex) प्रस्तावित किया गया है, जो भविष्य में परियोजनाओं और नेटवर्क आधुनिकीकरण के लिए दिशा निर्देश होगा।
मुख्य विवरण और तथ्य
बड़ा कैपेक्स — ₹2,93,030 करोड़
budget 2026 में रेल मंत्रालय के लिए कुल पूंजीगत व्यय के रूप में ₹2,93,030 करोड़ का प्रवचन किया गया है। यह राशि भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे, ट्रैक अपग्रेड, सिग्नलिंग और आधुनिककरण परियोजनाओं के लिए केंद्रित होगी। यह कदम यह दर्शाता है कि सरकार रेलवे को प्राथमिकता देती रही है और अगले वित्तीय वर्ष 2026–27 में बड़े निवेश की पेशकश कर रही है।
राष्ट्रीय सार्वजनिक निवेश का संदर्भ
कुल सार्वजनिक पूंजीगत व्यय भी बढ़ाया गया है; वित्त मंत्री ने FY 2026–27 के लिए सार्वजनिक कैपेक्स ₹12.2 लाख करोड़ प्रस्तावित किया, जो कि पिछले वर्ष के ₹11.2 लाख करोड़ से अधिक है। इस व्यापक कैपेक्स प्रेरणा का लाभ रेलवे सहित कई आधारभूत परियोजनाओं को होगा और उन क्षेत्रों में तेजी ला सकता है जिनका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है।
हाई‑स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना
बजट में यह भी कहा गया है कि भारत 7 हाई‑स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन कॉरिडोर्स से लंबी दूरी की यातायात क्षमता और यात्रा समय में उल्लेखनीय कटौती संभव होगी, हालांकि इन परियोजनाओं के विस्तृत वित्तपोषण और क्रियान्वयन विवरण आगे घोषित किए जाएंगे।
निष्कर्ष और महत्व
railway budget 2026 रेलवे के आधुनिकीकरण और नेटवर्क विस्तार के लिए एक निर्णायक कदम प्रतीत होता है। ₹2.93 लाख करोड़ का कैपेक्स और कुल सार्वजनिक निवेश में वृद्धि यह संकेत देती है कि अगले वर्षों में रेल सेवा, कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद है। पाठकों के लिए महत्वपूर्ण यह है कि इन घोषणाओं का असर स्थानीय परियोजनाओं और यात्रा सुविधाओं पर तब नजर आएगा जब क्रियान्वयन और परियोजना‑विशेष योजनाएं स्पष्ट हों। भविष्य में प्रस्तावित हाई‑स्पीड कॉरिडोर और बड़ी पूंजीगत व्यय से यात्री और माल ढुलाई दोनों क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल सकता है।









