শুক্রবার, জানুয়ারি 30

बोनस शेयर: परिभाषा, प्रक्रिया और निवेशकों के लिए प्रभाव

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परिचय: क्यों महत्वपूर्ण है बोनस शेयर का विषय

बोनस शेयर किसी भी शेयर बाजार और कॉर्पोरेट कॉर्पस के लिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये कंपनी की जगत में उपलब्ध नकदी के बजाय आरक्षित निधियों को इक्विटी में बदलकर मौजूदा शेयरधारकों को अतिरिक्त हिस्सेदारी देते हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत हो सकता है कि कंपनी के पास अर्जित रिज़र्व उपलब्ध हैं और प्रबंधन शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

बोनस शेयर क्या हैं?

बोनस शेयर वे अतिरिक्त शेयर होते हैं जो कोई कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को निशुल्क देती है। इन्हें “फ्री इश्यू” भी कहा जाता है। बोनस शेयर आमतौर पर कंपनी की फ्री रिज़र्व, सिक्योरिटीज प्रीमियम अकाउंट या कैपिटल रिडेम्प्शन रिज़र्व से जारी किए जाते हैं। बोनस इश्यू का अनुपात (जैसे 1:1, 2:1, 3:2 इत्यादि) निर्धारित होता है—जो दर्शाता है कि हर कितने मौजूदा शेयरों पर कितने बोनस शेयर मिलेंगे।

बोनस शेयर जारी करने की प्रक्रिया

कंपनी के बोर्ड और आवश्यक होने पर शेयरधारक प्राधिकरण के बाद बोनस शेयर जारी होते हैं। कंपनी रिकॉर्ड डेट निर्धारित करती है—जो दिन उस सूची में दर्ज शेयरधारकों को बोनस अलॉट किया जाएगा। जारी करने से कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन सामान्यतः अपरिवर्तित रहता है, पर प्रति शेयर मूल्य (प्राइस पर शेयर) समायोजित हो जाता है क्योंकि शेयरों की संख्या बढ़ जाती है।

निवेशक पर प्रभाव और लाभ-हानि

बोनस शेयर से शेयर की तरलता बढ़ सकती है और छोटे निवेशकों के लिए शेयर सस्ती दिख सकती है, पर मौजूदा शेयरधारकों की प्रतिशत भागीदारी सामान्यतः अपरिवर्तित रहती है। यह कंपनी की आर्थिक मजबूती का सकारात्मक संकेत भी माना जा सकता है, हालाँकि कभी-कभी बोनस इश्यू को केवल कीमत समायोजन के रूप में भी देखा जाता है।

विधिक और कर पहलू

बोनस शेयर के अलॉटमेंट पर आम तौर पर आवंटन के समय आयकर के तहत सीधे कर नहीं लगता; परंतु बाद में जब इन्हें बेचा जाता है तो पूंजीगत लाभ (capital gains) नियम लागू होते हैं। बोनस शेयर और संबंधित टैक्स निहितताओं के संबंध में सटीक जानकारी के लिए कर सलाहकार से परामर्श आवश्यक है।

निष्कर्ष

बोनस शेयर निवेशकों के लिए कंपनी की स्थिति और रिवार्ड नीति का संकेत हो सकते हैं। वे तरलता और शेयर आधार बढ़ाने में सहायक होते हैं, पर निवेशकों को रिकॉर्ड डेट, बोनस अनुपात और दीर्घकालिक वित्तीय संकेतकों को ध्यान से जांचना चाहिए। भविष्य में बोनस इश्यू का प्रभाव कंपनी की वास्तविक वित्तीय प्रगति और बाजार की धारणा पर निर्भर रहेगा।

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