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जसप्रीत बुमराह की उपलब्धियाँ और करियर ओवरव्यू

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परिचय: क्यों महत्वपूर्ण है जसप्रीत बुमराह

जसप्रीत बुमराह (जसबीरसिंह बुमराह) का नाम आधुनिक क्रिकेट में तेज़ गेंदबाज़ी के प्रतीक के रूप में उभरा है। 6 दिसंबर 1993 को अहमदाबाद, गुजरात में जन्मे बुमराह भारत की राष्ट्रीय टीम में सभी तीनों प्रारूपों के लिए नियमित हैं और टेस्ट व टी20आई में भारत की कप्तानी भी कर चुके हैं। उन्हें वर्तमान समय का सर्वश्रेष्ठ ऑल‑फॉर्मेट पेस गेंदबाज़ और इतिहास के प्रमुख फास्ट बॉलरों में से एक माना जाता है। उनका प्रदर्शन टीम इंडिया के गेंदबाजी विभाग के संतुलन और सफलता के लिए निर्णायक है।

करियर के मुख्य मुक़ाम

बुमराह को अप्रैल 2019 में भारत की ICC क्रिकेट विश्व कप 2019 टीम में शामिल किया गया था। उन टूर्नामेंट में वे भारत के अग्रणी विकट‑संकलकों में रहे और कुल 18 विकेट लेकर टीम के शीर्ष गेंदबाज़ों में शामिल रहे। 6 जुलाई 2019 को श्रीलंका के खिलाफ मैच में वे अपनी 57वीं ODI पारी में 100वां ODI विकेट लेकर दूसरे सबसे तेज़ भारतीय (मोहम्मद शमी के बाद) बन गए।

सितंबर 2023 में उन्हें 2023 क्रिकेट विश्व कप के 15 सदस्यीय भारतीय स्क्वाड में चुना गया। दिल्ली में अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में उन्होंने केवल 3.90 की इकॉनमी दर से चार विकेट लेकर महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सांख्यिकी और गेंदबाज़ी शैली

आँकड़ों के अनुसार (प्रदान स्रोतों के अनुसार), टेस्ट में 27 मैचों में उनके 113 विकेट हैं (औसत 22.85), वनडे में 68 मैचों में 110 विकेट (औसत 25.33), और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 55 मैचों में 66 विकेट (औसत 19.54)। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके पास 55 मैचों में 205 विकेट हैं (औसत 24.12)। उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी आंकड़े टेस्ट में 6/27, वनडे में 5/27 और टी20आई में 3/11 दर्ज हैं।

तकनीकी रूप से बुमराह की गेंदबाज़ी 140–145 किमी/घंटा की नियमित रफ्तार, इन‑स्विंगिंग यॉर्कर और सटीक लाइन‑लेंथ पर आधारित है, जो उन्हें तेज़ और निर्णायक बनाती है। 3 फरवरी 2024 को इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के दूसरे टेस्ट में वे टेस्ट क्रिकेट में 150 विकेट पूरे करने वाले सबसे तेज़ भारतीय पेसर बन गए (34 मैच), और साथ ही भारतीय बॉलरों में संयुक्त तीसरे सबसे तेज़ भी बने।

निष्कर्ष और महत्व

बुमराह की उपलब्धियाँ और सांख्यिकी यह स्पष्ट करती हैं कि वे आधुनिक भारतीय क्रिकेट के स्तम्भ हैं। उनकी गति, यॉर्कर कौशल और स्थिर प्रदर्शन आने वाले वर्षों में टीम इंडिया के लिए निर्णायक बने रहेंगे। फिटनेस और लगातार प्रदर्शन के आधार पर बुमराह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपनी अग्रणी भूमिका को और भी अधिक सुदृढ़ कर सकते हैं।

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