মঙ্গলবার, ফেব্রুয়ারি 24

होली कब है: तिथियाँ, महत्व और आयोजन

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परिचय: होली का महत्त्व और प्रासंगिकता

होली भारत और दुनिया में मनाया जाने वाला प्रमुख रंगों का त्योहार है। प्रश्न “होली कब है” न केवल उत्सव की तिथि जानने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सार्वजनिक छुट्टियों, सामाजिक आयोजनों और यात्रा योजनाओं के निर्धारण के लिए भी प्रासंगिक है। पारंपरिक तथा आधुनिक संदर्भों में होली की तिथि का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बड़ा होता है।

होली कब है — तिथि कैसे तय होती है

होली की तिथि हिंदू चंद्र कैलेंडर पर निर्भर करती है। सामान्यतः होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा (प्लेनीमून) के दिन मनाई जाती है। होलिका दहन त्योहार से ठीक पहले की शाम को होता है और अगला दिन रंगवाली होली या धुलेंद्रण के रूप में मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह तिथियाँ फरवरी और मार्च के बीच आती हैं, लेकिन हर वर्ष तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्र चक्र पर आधारित है।

क्षेत्रीय विविधताएँ और व्यवहार

“होली कब है” का उत्तर राज्य और समुदाय के अनुसार बदल सकता है। कुछ स्थानों पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के कारण होलिका दहन और रंगों का दिन अलग-अलग पड़ सकते हैं। उत्तर भारत में रंगवाली होली आमतौर पर फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है, जबकि कुछ दक्षिणी और पूर्वी प्रथाओं में तिथियों में भिन्नता देखी जाती है। इसके अलावा सार्वजनिक छुट्टियां राज्य सरकारें घोषित करती हैं, इसलिए कार्यस्थल और शैक्षणिक संस्थानों की छुट्टियाँ अलग हो सकती हैं।

निष्कर्ष: क्या करना चाहिए और क्या उम्मीद रखें

यदि आप जानना चाहते हैं कि “होली कब है” तो सबसे भरोसेमंद तरीका है अपने स्थानीय पंचांग, मंदिर या राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक छुट्टी सूची की जाँच करना। सामान्य रूप से होली फरवरी-अप्रैल की अवधि में आती है—अधिकतर वर्षों में फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास। त्योहार की तैयारी, सुरक्षा, और पर्यावरणहितैषी रंगों के उपयोग पर ध्यान दें। आने वाली होली के तिथियों और आयोजनों की सही जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोत और स्थानीय धार्मिक संस्थानों की पुष्टि करें।

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