রবিবার, জানুয়ারি 11

सकट चौथ व्रत: महत्व, पूजा विधि और परंपराएँ

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सकट चौथ व्रत का महत्व

सकट चौथ व्रत, जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति और परिवार की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए भगवान गणेश की पूजा करती हैं। इस दिन विशेष रूप से चंद्रमा की पूजा का महत्व होता है।

सकट चौथ व्रत की पूजा विधि

सकट चौथ व्रत करने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और अपने घर के मंदिर की सफाई करती हैं। इसके बाद वे भगवान गणेश और उनकी माता पार्वती की मूर्ति को पूजा स्थल पर स्थापित करती हैं। महिलाएं व्रत के दौरान सभी वर्जित खाद्य पदार्थों से परहेज करती हैं और संपूर्ण दिन उपवासी रहकर सांयकाल चंद्रमा को अर्ध्य देती हैं। विशेष पूजा सामग्री जैसे मीठे चावल, गुड़, और फल चढ़ाए जाते हैं।

सकट चौथ का सामाजिक महत्व

यह व्रत न केवल अनुष्ठान का हिस्सा है, बल्कि समाज में एकजुटता और आपसी स्नेह का प्रतीक भी है। इस अवसर पर महिलाएं एकत्रित होकर अपने अनुभवों को साझा करती हैं और आपस में सहयोग बढ़ाती हैं। यह व्रत परिवार में सुख और समृद्धि लाने के लिए भी माना जाता है।

निष्कर्ष

सकट चौथ व्रत हिंदू संस्कृति में न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक संबंधों को मजबूती भी प्रदान करता है। आने वाले वर्षों में इस व्रत का आयोजन और भी धूमधाम से किया जाएगा। यह व्रत न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि हमारी पारंपरिक मूल्यों को भी संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रकार, सकट चौथ व्रत का पालन हमारे जीवन में सकारात्मकता और एकता ला सकता है।

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