মঙ্গলবার, এপ্রিল 1

शीतला सप्तमी: शीतला माता की विशेष पूजा

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शीतला सप्तमी का महत्व

शीतला सप्तमी, जिसे शीतला माता की पूजा के लिए मनाया जाता है, भारतीय पर्वों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह पर्व हर साल चैत्र मास की सप्तमी को मनाया जाता है। शीतला माता को स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण की देवी माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से ठंडे खाना बनाने और खाने की परंपरा होती है, जो इस पर्व को विशेष बनाती है।

शीतला माता की पूजा विधि

शीतला सप्तमी पर श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं। इसके बाद वे शीतला माता की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। इस दिन विशेष रूप से ठंडे व्यंजनों का भोग लगाया जाता है, जिसमें चावल, दही और चटनी शामिल होती है। पूजा के दौरान भक्तजन मां से स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

शीतला सप्तमी का पर्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह दिन पूरे परिवार को एक साथ लाता है और एकता तथा भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है। इस पर्व पर लोग एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं और पारिवारिक मिलन समारोह आयोजित करते हैं।

निष्कर्ष

शीतला सप्तमी का पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक घटना भी है। यह स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली का प्रतीक है। भक्तजन इस दिन शीतला माता की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को खुशहाल बनाते हैं। इस पर्व का महत्व हर वर्ष बढ़ता जा रहा है, विशेषकर नई पीढ़ी के बीच, जो अपनी परंपराओं को संजोए रखना चाहती है।

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