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पूर्णिमा कब है: तारीख, गणना और धार्मिक महत्व

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परिचय

पूर्णिमा कब है यह जानना भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में महत्वपूर्ण है। पूर्णिमा, यानी चंद्रमा का पूर्ण रूप से प्रकाशित होना, हरेक हिंदू महीने में एक बार आता है और कई व्रत, उत्सव और धार्मिक अनुष्ठानों के दिन को निर्धारित करता है। समय और तिथि इतिहास, लोक आस्था और दैनिक जीवन दोनों के लिहाज से प्रासंगिक रहती है।

मुख्य विवरण — पूर्णिमा क्या और कब होती है

भौतिक दृष्टि से पूर्णिमा तब होती है जब पृथ्वी की दृष्टि से चाँद सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में होता है और उसका पूरा प्रकाश दिखता है। खगोलीय रूप में यह घटना आम तौर पर हर सौर-चंद्र माह में एक बार घटित होती है; इस समयांतराल को साइनोडिक माह कहते हैं जिसकी औसत अवधि लगभग 29.53 दिन है। इसलिएGregorian कैलेंडर के अनुसार पूर्णिमा की तिथि हर महीने बदलती रहती है।

हिंदू पंचांग में पूर्णिमा को शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि कहा जाता है और यह त्योहारों तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आधार बनती है। प्रमुख पूर्णिमाओं में कार्तिक पूर्णिमा, फाल्गुन/धूलिवंदन (होली से जुड़ी) पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, और श्रावण/भाद्रपद की पूर्णिमा जैसे दिन शामिल हैं।

पूर्णिमा कब पता करें — तरीका और सुझाव

किसी विशेष माह की पूर्णिमा कब है यह जानने के लिए विश्वसनीय उपाय हैं:

  • स्थानीय पंचांग या तिथि-पत्र देखें — ये स्थानीय समय और क्षेत्र के अनुसार सटीक जानकारी देते हैं।
  • खगोलीय/full moon कैलकुलेटर या एप्लीकेशन का उपयोग करें — ये चंद्रमा के पूर्ण बनने का तात्कालिक समय (UTC या स्थानीय समय) दिखाते हैं।
  • मंदिर या धार्मिक पंडित से पुष्टि करें — त्यौहारों और व्रतों के लिए पारंपरिक नियम लागू हो सकते हैं।

ध्यान रखें कि कुछ अनुष्ठानों के लिए तिथि का निर्धारण उस समय के अनुसार होता है जब सुबह का सूर्योदय होता है, इसलिए केवल रात में पूर्ण चंद्र दिखना ही हमेशा निर्णायक नहीं होता।

निष्कर्ष

संक्षेप में, “पूर्णिमा कब है” का उत्तर हर महीने बदलता है क्योंकि यह चंद्र चक्र पर निर्भर करता है। सटीक तिथि और समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग, खगोलीय डेटाबेस या विश्वसनीय धार्मिक स्रोत की जाँच करें। पूर्णिमाएँ धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण हैं — इनके जानकार होने से आयोजन और व्रत सही ढंग से संपन्न किए जा सकते हैं।

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