বৃহস্পতিবার, জানুয়ারি 29

ग्यारस कब है — महत्व, नियम और तारीख कैसे पता करें

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परिचय: ग्यारस का महत्व और प्रासंगिकता

हिंदू धर्म में ग्यारस या एकादशी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।Many devotees consider the Ekadashi fast a way to purify body and mind, seek spiritual merit, or observe vrata for specific deities. इसलिए लोग अक्सर पूछते हैं: “ग्यारस कब है” ताकि वे उपवास, पूजा और संबंधित अनुष्ठान योजनाबद्ध कर सकें। सही तिथि जानना आवश्यक है क्योंकि ग्यारस का समय चंद्र तिथि (लूनर तिथि) पर निर्भर करता है और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकता है।

मुख्य तथ्य: ग्यारस किन समीकरणों पर निर्भर करती है

ग्यारस या एकादशी चंद्र सौर कैलेंडर की 11वीं तिथि होती है और हर हिंदू महीने में दो बार आती है — शुक्ल पक्ष (चंद्र के बढ़ने पर) और कृष्ण पक्ष (चंद्र के घटने पर)। इसलिए सामान्यतः हर महीने दो ग्यारस आती हैं, लेकिन तिथियों और समयावधियों के कारण कभी-कभी उपवास और पालन का निर्धारण स्थानीय नियमों पर निर्भर करता है।

तिथि तथा समय की जाँच कैसे करें

क्योंकि ग्यारस तिथि चंद्र की स्थिति से तय होती है, सही दिन और आरम्भ/समाप्ति का समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग या प्रमाणित ऑनलाइन संसाधन देखें। मंदिरों के सूचनापट, पंडितों, या स्थानीय धर्मिक संस्थाओं से भी पुष्टि की जा सकती है। कुछ लोग ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय को आधार मानकर अनुष्ठान करते हैं; इसलिए स्थानिक प्रथाएँ मायने रखती हैं।

उपवास और परंपराएँ

ग्यारस के उपवास के नियम समुदाय और परंपरा के अनुसार अलग होते हैं — कुछ लोग पूरे दिन निर्जल उपवास रखते हैं, कुछ केवल अनाज/दाल से परहेज करते हैं। कथा-पाठ, पूजा, जप और दान भी आम प्रथाएँ हैं। यदि आप पहली बार उपवास कर रहे हैं तो स्थानीय पुजारी या अनुभवी व्यक्ति से मार्गदर्शन लेना उपयोगी होगा।

निष्कर्ष: पाठकों के लिए सार और सुझाव

यदि आप जानना चाहते हैं “ग्यारस कब है”, तो सबसे विश्वसनीय तरीका स्थानीय पंचांग या आधिकारिक धार्मिक संस्थान से तिथि और समय की पुष्टि करना है। चूँकि ग्यारस महीने में दो बार आती है और समय स्थानीय कैलेंडर पर निर्भर करता है, योजना बनाते समय सुनिश्चित करें कि आपने सही तिथि, आरम्भ और समाप्ति समय की जाँच कर ली है। इससे उपवास व अनुष्ठान व्यवस्थित और पारंपरिक नियमों के अनुरूप निभाये जा सकते हैं।

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