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आज का बजट: निर्मला सीतारमण ने पेश किया 2026-27 का नौवाँ बजट

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परिचय: बजट का महत्व और प्रासंगिकता

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। यह उनका रिकॉर्ड नौवाँ बजट है और इसे 1 फरवरी को संसद में पेश किया गया। बजट देश की आर्थिक नीति, सार्वजनिक व्यय और कर संरचना के लिए मार्गदर्शक होता है; इसलिए हर साल इसे निवेशक, व्यापारी, छोटे व्यवसाय और आम नागरिक गहराई से देखते हैं। विशेष रूप से इस वर्ष बजट को माघ पूर्णिमा तथा गुरु रविदास जी की जन्मशती के पावन अवसर पर पेश किया जाना सांकेतिक रूप से भी देखा गया।

मुख्य बातें और विवरण

आर्थिक अनुमानों और खर्च

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रखा गया राजकोषीय घाटा लगभग 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में वृद्धि की घोषणा करते हुए इसे 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जो बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करने का संकेत है।

MSME और व्यापार विकास

बजट को MSME सेक्टर को “लोकल से ग्लोबल” बनाने की ताकत देने वाला बताया गया है। केंद्रीय घोषणा के अनुसार MSME को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के अवसर उपलब्ध कराने पर बल दिया गया है, जो छोटे और मध्यम उद्यमों के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लागत और जनजीवन

सूत्रों के अनुसार खाने-पीने की चीजें सस्ती हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। उपभोक्ता वस्तुओं में मूल्य प्रवृत्तियों के बदलने का असर ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में देखा जाएगा।

निष्कर्ष और पाठकों के लिए महत्व

इस बजट का फोकस पूंजीगत व्यय बढ़ाकर आर्थिक बुनियादी ढांचे मजबूत करना और MSME को वैश्विक मंच पर सशक्त बनाना रहा है। राजकोषीय घाटा 4.3% पर बनाए रखने का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन का संकेत देता है, जबकि उच्च कैपिटल व्यय दीर्घकालिक विकास को समर्थन दे सकता है। पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट से कर या सब्सिडी से जुड़ी कोई विस्तृत सूचना इस सारांश में शामिल नहीं है; छोटे व्यवसाय और उपभोक्ता आगे की घोषणाओं तथा विस्तृत बजट दस्तावेज़ को देखकर अपने निर्णय लें। भविष्य में बजट की नीतियों का प्रभाव निवेश, रोजगार और महंगाई पर देखा जाएगा।

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