বুধবার, এপ্রিল 15

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025: डिजिटल समावेश की ओर एक कदम

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परिचय

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर वर्ष 8 सितंबर को मनाया जाता है, जो पढ़ने और लिखने की शक्ति का जश्न मनाता है और मौजूदा चुनौतियों पर प्रकाश डालता है। यह शिक्षा के अधिकार की वकालत करने और समावेशी, न्यायसंगत और समृद्ध समाजों के निर्माण में साक्षरता की केंद्रीय भूमिका को पहचानने का दिन है।

2025 का विषय और महत्व

2025 के लिए विषय है “डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना।” यह विषय डिजिटल विभाजन को पाटने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं प्रौद्योगिकी से संचालित युग में समुदायों को सशक्त बनाने में साक्षरता की भूमिका पर केंद्रित है।

वैश्विक चुनौतियां और प्रगति

2024 में, विश्व में कम से कम 739 मिलियन युवा और वयस्क अभी भी बुनियादी साक्षरता कौशल से वंचित हैं। डिजिटल उपकरण हाशिए पर पड़े समूहों के लिए सीखने के अवसरों का विस्तार कर सकते हैं, लेकिन यह डिजिटल बदलाव दोहरे हाशियेकरण का जोखिम भी पैदा करता है – न केवल पारंपरिक साक्षरता सीखने से बहिष्करण बल्कि डिजिटल युग के लाभों से भी।

प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं: गरीबी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच की कमी, लैंगिक असमानता, संघर्ष और विस्थापन, और बढ़ता डिजिटल विभाजन। महिलाएं, ग्रामीण लोग, प्रवासी और विकलांग व्यक्ति जैसे हाशिए के समूहों के बीच साक्षरता में कई बाधाएं हैं। इस अंतर को गरीबी, सांस्कृतिक मान्यताएं और संसाधनों की कमी और बढ़ा देती है।

वैश्विक प्रतिक्रिया और समाधान

इस दिन पर, सरकारें, गैर-सरकारी संगठन, स्कूल और अंतर्राष्ट्रीय संगठन सेमिनार, साक्षरता अभियान, सामुदायिक पठन सत्र और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अभियान आयोजित करते हैं। साक्षरता को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को विशेष पुरस्कार भी दिए जाते हैं।

साक्षरता सीखने और अवसर की नींव है। व्यक्तियों के लिए, साक्षरता का अर्थ है बेहतर स्वास्थ्य जागरूकता, बेहतर रोजगार क्षमता, मजबूत आत्मविश्वास और सक्रिय नागरिकता। समुदायों के लिए, यह सामाजिक समावेश, आर्थिक विकास और शांतिपूर्ण जुड़ाव को बढ़ावा देती है।

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